मनरेगा/ नरेगा में धांधली अथवा घोटाला करने के कुछ मुख्य तरीके-

different ways of MNREGA / NREGA

मनरेगा/ नरेगा में धांधली अथवा घोटाला करने के कुछ  मुख्य तरीके-

प्राय देखा जाता है कि सरकार द्वारा कई योजनाओं का शिलान्यास धरातल पर बेरोजगारी तथा गरीबी उत्थान के लिए किया जाता है किंतु इन योजनाओं का वास्तविक रूप देखने को नहीं मिलता है क्योंकि इन योजनाओं  में एक ऐसा गिरोह अथवा माफिया सक्रिय हो जाता है जो कि ग्रामीण स्तर से लेकर विभिन्न सरकारी विभागों के अंदर तक छुपा हुआ रहता है.

आइए  बात करते हैं इसी तरह के कुछ ऐसे कामों  के बारे में जो कि धांधली , घोटालेबाज एवं भ्रष्टाचार को मनरेगा  से जोड़ता है. 

जॉब कार्ड –   इस कार्ड की सुविधा उस ग्रामीण अथवा मजदूर को दिया जाता है जोकि मजदूरी अथवा श्रम कार्य के आधार पर अपना जीवन यापन कर सके इसमें पूर्व में ₹183 तथा वर्तमान में ₹202 प्रतिदिन की मजदूरी भारत सरकार द्वारा निर्धारित है इस कार्ड के अंतर्गत 1 वर्ष में 100 दिन की रोजगार गारंटी दी जाती है

 जॉब कार्ड को मजदूर अथवा श्रमिक द्वारा अपने साथ रखा जाता है तथा प्रतिदिन अपनी उपस्थिति इसमें लगवानी होती है .

धरातल पर देखा जाए तो मजदूर के पास अपना श्रम कार्ड का नंबर तक मालूम नहीं होता सभी के श्रम कार्ड प्रधान द्वारा अपने पास रख ले जाते हैं यह भी एक तरह का अपराध है.

 फर्जी मस्टर रोल-    मस्टर रोल के अंतर्गत कार्य करने वाले व्यक्ति का नाम भरा जाता है जिसमें उसके द्वारा कार्य करने की इच्छा जाहिर की जाती है किंतु ग्राम स्तर  पर कुछ ऐसे लोग चाहे वह प्रधानों या स्थानीय ठेकेदार फर्जी मस्टररोल की आड़ में अपना उल्लू सीधा करते हैं

 इस लिंक के माध्यम से  किसी कार्य का मस्टर रोल चेक कैसे कर सकते हैं  – 

 सरकारी कर्मचारी का ठेकेदारों के साथ और प्रधानों के साथ भागीदारी- धरातल स्तर पर कोई भी प्रधान अथवा ठेकेदार फर्जी मस्टररोल तब तक नहीं भर सकता जब तक उसे सरकारी कर्मचारी अथवा  मनरेगा सहायक या ग्राम विकास अधिकारी का संरक्षण प्रार्थना हो. इस तरह के फर्जी मस्टररोल अथवा फर्जी खातों के माध्यम से  सरकारी कर्मचारी भी भ्रष्टाचार में लिप्त होते हैं.

फर्जी खातों से धन निकासी-   फर्जी खातों से तात्पर्य उन व्यक्तियों के खातों से है जो कि किसी भी मनरेगा निर्माण कार्य में कार्य करने हेतु नहीं गए अथवा ना ही मनरेगा निर्माण कार्य से  किसी तरह का संबंध रखते हैं. क्योंकि मनरेगा कार्य करने पर सरकार द्वारा पैसों का भुगतान सीधे लेबर के खाते में किया जाता है जिसका वर्तमान मूल्य ₹202 प्रति दिन है स्थानीय प्रधान अथवा ठेकेदार के आपसे गठजोड़ के चलते फर्जी खातों से पैसा निकाल लिया जाता है जिसका कुछ प्रतिशत खातेदार को दे दिया जाता है खाताधारक  भी इस कार्य में संकोच नहीं करता है क्योंकि जानकारियों के अभाव तथा कुछ पैसों के लालच में वह अपनी सहमति बैंक से पैसा निकासी हेतु दे देता है.

फर्जी  मजदूरी-  फर्जी मजदूरी के अंतर्गत यदि देखा जाए तो  मनरेगा के अंतर्गत पर्दे मिलने वाली मजदूरी को बढ़ाने हेतु मजदूर के दिनों की संख्या में इजाफा कर दिया जाता है जिससे मजदूर के खाते में दुनी राशि   ढल जाती है. 

फर्जी कार्य –  फर्जी कार्यों के अंतर्गत प्रधान द्वारा स्थानीय ग्राम विकास अधिकारी द्वारा मिलीभगत कर ऐसे कार्यों को भी ऑनलाइन  सीएमएस में चढ़ाया जाता है जहां पर इस तरह के कार्य की जरूरत नहीं है पता चला है कि कई बार स्थानीय प्रधान काफी पुराने कार्यों को नया दिखाकर पैसे की ठगी करते हैं.

मनरेगा लोकपाल –  प्रत्येक जिला स्तर पर इन सभी फर्जी कार्यों की निगरानी हेतु एक लोकपाल की स्थापना की गई है जोकि किसी भी तरह के भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों का निवारण अपने स्तर पर करता है लोकपाल सीधा मुख्य सचिव स्तर के अधिकारियों से जुड़ा हुआ रहता है तथा अपनी रिपोर्ट सीधा ऊपरी स्तर तक देता है.